सुचना का अधिकार २००५ में पुरे देश में लागु हुवा.झारखण्ड में भी लागु हुवा.आज ये कानून पारित हुए तिन सल् से अधिक हो गए गए है.लेकिन सही तरीके से आज भी झारखण्ड में यह कानून लागु नही हो पा रहा है.कारन क्या हो सकता है.सिर्फ़ एक ही कारन है है...........की नौकरशाह अपने को आम आदमी का नौकर कम अधिकारी ज्यादा भुजता है.आम आदमी से पर नौकरशाही हावी है.वो सूचना नही देना चाहते क्यूंकि उन्हें सुचना दे देने से उनके लिए परेशानी खड़ी हो शक्ति है। क्यूंकि इंदिरा आवास में उन्होंने वंचित आदमी को इंदिरा आवास आवंटित किया नही,नौकरी में पैसे और पैरवी के बल पर नौकरी दे दी.सरकार की जितनी भी विकाश की योजनाये है उनको इन लोगो ने अपने आर्थिक लाभ के लिए बिचौलिए से मिलकर दुसरो को दे दी .आम आदमी को सुचना का अधिकार पारित होने से लगा था की अब हमें सही कम के लिए घुस नही देने पड़ेंगे,लेकिन ऐसा हुवा नही!आज देश के सबसे अधिक भ्रस्थ राज्यों में पहले पहले पायदान पर अपना झारखण्ड है.सोचने की जरुरत है.......!
मैंने सुचना का अधिकार के तहत रांची यूनिवर्सिटी,झारखण्ड लोक सेवा आयोग गृह विभाग,विधानसभा मारवारी कॉलेज आदि जगहों से के बिन्दुवो पे जरुरी सुच्न्ये मांगी.लेकिन ५-८ महीने हो गए अभी तक मेरे द्वारा मब्गी गयी सुचने अभी तक अप्राप्त है.mअमला राज्य सुचना आयोग में है लेकिन यहाँ भी उम्मीद की किरण नही दिखई पड़ती.प्रभारी मुख्या सुचना आयुक्त रामबिलास गुप्ता के बेंच में मेरा मामला है.लेकिअभी तक उनके द्वारा सुचना दिलाने का कोई आदेस पारित नही गया है,बल्कि वे आवेदक को दंत पिलाते है.क्या कहे इस राज्य में आपकी सुनाने वाला कोई नही.सभी लिप्त है.कोई कम पा रहा है तो कोई अरबो में पा रहा है फर्क सिर्फ़ इतना है है.झारखण्ड लोक सेवा आयोघ्ग ने तो सुच्नना देने की कसम खा राखी है.पहले ३० दिन के अन्दर कोई सुचना नही देनेग,उसके ३बद ३० दिन प्रथम अपील में भी आपको सुचना नही मिलेंगी.आको हर हल में राज्य सुचना आयोग में जन ही होगा.वह भी डेट मिलने में२ महीने में मिल्नेगे.सुचना आयोग का किसी भी सरकारी कर्मचारी कोई भय है है.क्यूंकि सुचना आयुक्त इनको दंड देते नही है.अपने पड़ोसी राज्य बिहारइके कम कर में सुचना अधिकार बहुत अच्छे taike se kam kar raha hai.
बुधवार, 4 मार्च 2009
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)